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ISSN : 2583-9667, Impact Factor: 6.49

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Abstract

International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2025;3(3):95-99

वैश्विक महामारी (Covid-19) के बाद इतिहास का बदलता स्वरूप एवं परिदृश्य

Author : Pradeep Shukla and Amar Kumar Bharati

Abstract

कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी ने संपूर्ण मानव समाज को एक अप्रत्याशित और गहरे संकट में डाला, जिसने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक ढांचे को प्रभावित किया, बल्कि सामाजिक ताने-बाने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक राजनीतिक संरचनाओं को भी बदलकर रख दिया। इस महामारी ने मानव जाति को यह सोचने पर विवश कर दिया कि हमारी आधुनिक व्यवस्थाएं कितनी नाजुक और असुरक्षित हैं। कोविड-19 ने न केवल वर्तमान को ही चुनौती दी, बल्कि अतीत की घटनाओं, सभ्यताओं के उत्थान-पतन और उनके मूल्यांकन की पद्धतियों को भी एक नवीन दृष्टिकोण से देखने के लिए विवश किया। इतिहास का पारंपरिक दृष्टिकोण जिसमें युद्ध, शासक और राजनीतिक घटनाएं ही प्रमुख रहती थीं, अब जैविक और सामाजिक संकटों के आलोक में पुनः मूल्यांकित किए जा रहे हैं। इस शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि कोविड-19 के व्यापक प्रभावों के संदर्भ में हम इतिहास को किस प्रकार एक नए परिप्रेक्ष्य से देख सकते हैं, जिसमें महामारी जैसी घटनाएं केवल सामाजिक स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि संभावित सभ्यता-परिवर्तनकारी कारक भी बन सकती हैं। विशेष रूप से जब हम सिंधु घाटी जैसी प्राचीन और विकसित सभ्यता के पतन को महामारी जैसी आपदाओं के परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास करते हैं, तो यह हमारे ऐतिहासिक अध्ययन को और अधिक समग्र और वैज्ञानिक बनाता है। इस शोध का लक्ष्य इतिहास लेखन के स्वरूप में उस परिवर्तन को उजागर करना है, जो कोविड-19 के अनुभवों के आलोक में उत्पन्न हुआ है।

Keywords

महामारी, कोविड-19, सिंधु सभ्यता, सभ्यता का पतन, प्रवास, वैश्वीकरण, ऐतिहासिक संशोधनवाद, महामारी।