Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2026;4(2):84-91
मध्यस्थ दर्शन के संदर्भ में शिक्षा का व्यावहारिक एवं मानवीयकरण
Author : डॉ. कान्ता पारीक
Abstract
यह शोध पत्र, श्री ए. नागराज (नागराज मुनि) द्वारा प्रतिपादित एक व्यापक दार्शनिक प्रणाली—'मध्यस्थ दर्शन' (सह-अस्तित्ववाद)—के आलोक में शिक्षा के व्यावहारिक और मानवीय आयामों की पड़ताल करता है। यह दर्शन मानवता को एक समग्र और सह-अस्तित्ववादी विश्वदृष्टि प्रदान करता है, जो भौतिक और आध्यात्मिक पक्षों को एक-दूसरे के अधीन किए बिना, उन्हें आपस में एकीकृत करता है। यह अध्ययन 'मानव तीर्थ धाम' में अपनाए जाने वाले अनुभवात्मक शिक्षण मॉडल की जाँच करता है; यह छत्तीसगढ़ में स्थित एक संस्थागत केंद्र है जो 'जीवंत शिक्षा' के माध्यम से इस दर्शन के प्रसार के लिए समर्पित है। इसके अतिरिक्त, यह अध्ययन मध्यस्थ दर्शन और बौद्ध 'मध्य मार्ग' (मज्झिम पटिपदा) के बीच दार्शनिक समानताएँ स्थापित करता है, और 'डेलर्स रिपोर्ट' (UNESCO, 1996)—जिसका शीर्षक 'Learning: The Treasure Within' (सीखना: भीतर छिपा खजाना) है—के चार स्तंभों के साथ एक सैद्धांतिक अभिसरण (मेल) दर्शाता है। अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि आधुनिक शिक्षा को मानवीय बनाने की दिशा में मध्यस्थ दर्शन में असाधारण क्षमता निहित है, और यह वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक शैक्षिक लक्ष्यों के लिए एक विशिष्ट भारतीय दार्शनिक आधार प्रदान करता है।
Keywords
मध्यस्थ दर्शन, शिक्षा, व्यावहारिक, मानवीयकरण, UNESCO