Article Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2025;3(3):71-73
चाँचरी सामूहिक नृत्यगीत शैली
Author : डाॅ. पंकज उप्रेती
Abstract
उत्तराखण्ड के कुमाऊँ अंचल में प्रचलित चाँचरी एक सामूहिक लोकनृत्य-गीत शैली है, जो भावनात्मक अभिव्यक्ति, लयात्मकता और सामूहिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। यह लोकगीत परंपरा पर्वतीय जनजीवन की सांस्कृतिक विविधता, कलाप्रियता और सामाजिक एकता को दर्शाती है। चाँचरी गीतों में धार्मिक, श्रृंगारिक, सामाजिक तथा समसामयिक विषयों का समावेश होता है। यह गीत-नृत्य शैली वृत्ताकार समूहों में स्त्री-पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत की जाती है, जिसमें गायन के साथ नृत्य की पदसंचालन प्रक्रिया लयबद्ध होती है। चाँचरी की लोकप्रियता का मूल कारण इसकी सहजता, लोकसंवेदना तथा सामूहिक उल्लास है। प्रस्तुत शोध में चाँचरी के क्षेत्रीय स्वरूप, भावबोध और लोक जीवन में उसके सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण किया गया है।
Keywords
चाँचरी, लोकगीत, कुमाऊँ, उत्तराखण्ड, लोकनृत्य, सामूहिकता, पर्वतीय संस्कृति, लोकसंगीत, लोक अभिव्यक्ति, श्रृंगारिक गीत, लोकसंवेदना, नृत्यगीत।