Article Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2026;4(2):113-117
भारतीय अर्थव्यवस्था पर पर्यावरणीय-क्रांति का प्रभाव: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author : डॉ. निरंजन कुमार
Abstract
यह शोध पत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में “पर्यावरणीय- क्रांति” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए विकास एवं प्रकृति के बीच संतुलन की व्याख्या करता है। वर्तमान में, विश्व एक “पर्यावरणीय- क्रांति” का सामना कर रहा है, जो एक बहुआयामी घटना है और “पर्यावरणीय- क्रांति”अर्थव्यवस्था की समग्र पुनर्व्याख्या के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहित करती है। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। यह पत्र भारत के संदर्भ में “पर्यावरणीय- क्रांति”के विकास और कृषि, उद्योग, ऊर्जा, रोजगार और कुल घरेलू उत्पाद (GDP) के क्षेत्रों के संबंध में भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करता है,यह शोध पत्र विश्लेषणात्मक, वर्णात्मक और नीति मूल्यांकन दृष्टिकोण से प्रस्तुत कियाहै। इस अध्ययन में द्वितीयक आँकड़ों, सरकारी नीति दस्तावेजों और NITI आयोग, MoEFCC, UNDP, IPCC और विश्व बैंक की रिपोर्टों का उपयोग किया गया है, जिसका उद्देश्य “पर्यावरणीय- क्रांति”और आर्थिक विकास के बीच मौजूद जटिल व्यवहारिक संतुलन और सहयोग को दर्शाना है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला है कि भारत उपयुक्त नीति हस्तक्षेप और संस्थागत परिवर्तनों के साथ एक हरित अर्थव्यवस्था के रास्ते पर है, जो अपने आर्थिक विकास को Sustain करेगा और SDGs (सतत विकास लक्ष्यों) को प्राप्त करेगा।
Keywords
पर्यावरणीय क्रांति, सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण-आर्थिक संतुलन, नवीकरणीय ऊर्जा, भारतीय अर्थव्यवस्था