Article Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2025;3(2):586-589
गुरुकुल शिक्षा प्रणाली और आधुनिक शिक्षा प्रणाली: एक तुलनात्मक अध्ययन
Author : Shalu
Abstract
शिक्षा किसी भी राष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक विकास का आधार होती है। भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल प्रणाली पर आधारित थी, जिसमें विद्यार्थियों के नैतिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक तथा शारीरिक विकास पर विशेष बल दिया जाता था। गुरुकुल शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मनिर्भरता, अनुशासन तथा जीवन मूल्यों का विकास करना था। इसके विपरीत आधुनिक शिक्षा प्रणाली विज्ञान, तकनीकी, व्यावसायिक कौशल तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित है, जो विद्यार्थियों को रोजगार एवं आधुनिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।
प्रस्तुत अध्ययन में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली एवं आधुनिक शिक्षा प्रणाली का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इसमें दोनों प्रणालियों के उद्देश्य, शिक्षण पद्धति, गुरु-शिष्य संबंध, शिक्षा का वातावरण, नैतिक मूल्यों, जीवन कौशल तथा विषय-वस्तु के स्वरूप का अध्ययन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि गुरुकुल शिक्षा प्रणाली नैतिकता, अनुशासन, आत्मनिर्भरता एवं व्यक्तित्व निर्माण में अधिक प्रभावी थी, जबकि आधुनिक शिक्षा प्रणाली वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता, रोजगार सृजन तथा वैश्विक अवसरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि दोनों प्रणालियों में कुछ सीमाएँ विद्यमान हैं। गुरुकुल प्रणाली में आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा का अभाव था, जबकि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों, गुरु-शिष्य संबंधों तथा जीवन कौशलों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि शिक्षा के समग्र एवं संतुलित विकास हेतु गुरुकुल शिक्षा की नैतिकता, अनुशासन और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा की वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टि के साथ समन्वित करना आवश्यक है। ऐसा समन्वय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
Keywords
गुरुकुल शिक्षा प्रणाली, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा, नई शिक्षा नीति 2020, सर्वांगीण विकास।