Article Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2025;3(4):253-260
लिवर सिरोसिस में कुपोषण, पोषण प्रबंधन एवं आधुनिक नैदानिक-चिकित्सीय दृष्टिकोण: एक समग्र समीक्षा
Author : Pratima Rani Ondkar and Dr. Vandana Tiwari
Abstract
लिवर सिरोसिस विश्व स्तर पर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो दीर्घकालिक यकृत रोगों का अंतिम चरण होने के साथ-साथ मृत्यु एवं रुग्णता का एक प्रमुख कारण है। इस रोग में स्वस्थ यकृत ऊतकों का स्थान रेशेदार ऊतक ले लेते हैं, जिससे यकृत की संरचना एवं कार्यक्षमता प्रभावित होती है। सिरोसिस के प्रमुख कारणों में अत्यधिक शराब सेवन, वायरल हेपेटाइटिस, नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज, ऑटोइम्यून विकार तथा आनुवंशिक रोग शामिल हैं। सिरोसिस के रोगियों में कुपोषण, सार्कोपेनिया तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी अत्यंत सामान्य समस्याएँ हैं, जो रोग की जटिलताओं और मृत्यु दर को बढ़ाती हैं। प्रस्तुत अध्ययन में लिवर सिरोसिस की रोगजनन प्रक्रिया, कारण, लक्षण, जटिलताएँ, निदान तकनीकों तथा पोषण प्रबंधन की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पर्याप्त ऊर्जा एवं प्रोटीन सेवन, बार-बार भोजन, देर रात्रि स्नैक, सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति, शाखा-श्रृंखला अमीनो अम्ल (BCAA) अनुपूरण तथा एंटरल न्यूट्रिशन जैसी रणनीतियाँ रोगियों के पोषण स्तर और जीवन गुणवत्ता में सुधार ला सकती हैं। इसके अतिरिक्त फाइब्रोस्कैन, इलास्टोग्राफी, आणविक बायोमार्कर, एंटीफाइब्रोटिक दवाओं, स्टेम सेल थेरेपी तथा यकृत प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक तकनीकों ने सिरोसिस के निदान एवं उपचार में नई संभावनाएँ प्रस्तुत की हैं। निष्कर्षतः, लिवर सिरोसिस के प्रभावी प्रबंधन के लिए प्रारंभिक निदान, समुचित पोषण हस्तक्षेप तथा बहुविषयक उपचार दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक हैं।
Keywords
लिवर सिरोसिस, कुपोषण, पोषण प्रबंधन, सार्कोपेनिया, यकृत प्रत्यारोपण, फाइब्रोसिस, BCAA