Email : editor.ijarmjournals@gmail.com

ISSN : 2583-9667, Impact Factor: 6.49

Contact : +91 7053938407

Email editor.ijarmjournals@gmail.com

Contact : +91 7053938407

Article Abstract

International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2026;4(3):66-68

आधे-अधूरे नाटक का रंग शिल्प

Author : पूजा देवी

Abstract

मोहन राकेश स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी नाटक के प्रमुख एवं प्रयोगधर्मी नाटककार हैं। उनके नाटक आषाढ़ का एक दिन, लहरों का राजहंस और आधे-अधूरे आधुनिक जीवन की जटिलताओं, मानवीय तनाव, पारिवारिक विघटन तथा स्त्री-पुरुष संबंधों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं। प्रस्तुत शोध में आधे-अधूरे के रंगशिल्प का अध्ययन किया गया है। इसमें दृश्य विधान, ध्वनि संकेत, प्रकाश योजना, वेशभूषा, मंच उपकरण, मौन विधान, दृश्य बंध तथा रंगमंचीयता जैसे प्रमुख तत्वों का विश्लेषण किया गया है। मोहन राकेश ने पारंपरिक नाट्य-शिल्प से अलग हटकर सहज भाषा, छोटे संवादों, यथार्थपरक मंच-सज्जा तथा ध्वनि और प्रकाश के सृजनात्मक प्रयोग द्वारा नाटक को अधिक प्रभावशाली और रंगमंचीय बनाया। आधे-अधूरे में महानगरीय जीवन के तनाव, पारिवारिक असंतोष, अकेलेपन और संबंधों की जटिलता को रंगशिल्प के माध्यम से सशक्त अभिव्यक्ति प्राप्त होती है। इस दृष्टि से आधे-अधूरे आधुनिक हिन्दी रंगमंच के विकास में एक महत्वपूर्ण और मील का पत्थर सिद्ध होता है।

Keywords

मोहन राकेश, आधे-अधूरे, रंगशिल्प, हिन्दी नाटक, रंगमंचीयता, दृश्य विधान, ध्वनि संकेत, प्रकाश योजना, वेशभूषा, मंच उपकरण, मौन विधान, आधुनिक नाटक।