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ISSN : 2583-9667, Impact Factor: 6.49

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Article Abstract

International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2025;3(1):394-401

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का कल्याण

Author : Pratima Kumari and Dr. Rajneesh Rai

Abstract

किसी भी समुदाय की प्रगति उसके ह्यूमन रिसोर्स की क्वालिटी पर निर्भर करती है। भारत में समाज के दूसरे वर्गों की तुलना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की शिक्षा में भागीदारी का अनुपात बहुत कम पाया गया है। अनुभवजन्य विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि उच्च जातियों के व्यक्तियों को शिक्षा, व्यावसायिक उन्नति और आर्थिक समृद्धि के अधिक अवसर मिलते हैं, जबकि निचली जातियों को अक्सर असंगठित क्षेत्र की कम वेतन वाली नौकरियों तक सीमित रहना पड़ता है। यद्यपि आरक्षण नीतियों और सामाजिक सुधार आंदोलनों ने कुछ हद तक गतिशीलता और सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है, फिर भी संरचनात्मक असमानताओं और सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों को समाप्त करने के लिए निरंतर और समावेशी प्रयासों की आवश्यकता है।अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण हेतु केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं; इसके लिए सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन, संसाधनों का समान वितरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की सार्वभौमिक पहुँच, तथा जाति-आधारित भेदभाव के विरुद्ध सख्त क्रियान्वयन आवश्यक है। तभी भारत में जातिगत पहचान का प्रभाव कम होकर सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सकते हैं।

Keywords

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, उच्च शिक्षा, जागरूकता, योजना।