Article Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2025;3(4):40-44
मातृत्व एवं बाल विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं एवं बाधाओं का कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन
Author : डॉ. आरती कोरी एवं नेहा सिंह
Abstract
प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य मातृत्व एवं बाल विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं एवं बाधाओं का कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। भारत सरकार द्वारा समेकित बाल विकास सेवा (ICDS), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), जननी सुरक्षा योजना (JSY), पोषण अभियान तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी अनेक योजनाएँ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा समग्र विकास को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं, किन्तु इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में प्रशासनिक कमियाँ, संसाधनों का अभाव, प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी, सेवाओं की अनियमित उपलब्धता, सामाजिक एवं आर्थिक बाधाएँ, जागरूकता का अभाव तथा भौगोलिक कठिनाइयाँ जैसी समस्याएँ उनकी प्रभावशीलता को प्रभावित करती हैं। प्रस्तुत अध्ययन में सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया तथा उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद के करनैलगंज एवं परसपुर विकास खण्डों के 10 ग्रामों से उद्देश्यपूर्ण नमूनाकरण द्वारा चयनित 400 ग्रामीण महिलाओं से साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से आँकड़े संकलित किए गए। अध्ययन के उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं एवं कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के मध्य संबंध का विश्लेषण काई-वर्ग (χ²) परीक्षण द्वारा किया गया। प्राप्त परिणामों के अनुसार जिन क्षेत्रों में क्रियान्वयन संबंधी समस्याएँ कम थीं वहाँ कार्यक्रम अधिक प्रभावी पाए गए, जबकि अधिक समस्याओं वाले क्षेत्रों में प्रभावशीलता में उल्लेखनीय कमी देखी गई। सांख्यिकीय विश्लेषण में χ² = 58.19 (df = 2, p = 0.000) प्राप्त हुआ, जिससे स्पष्ट हुआ कि क्रियान्वयन संबंधी समस्याओं एवं कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के मध्य अत्यंत महत्वपूर्ण संबंध विद्यमान है, अतः शून्य परिकल्पना अस्वीकृत की गई। अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता, प्रभावी प्रशासनिक समन्वय, नियमित निगरानी, प्रशिक्षित कार्यबल, समय पर सेवा वितरण तथा लाभार्थियों में जागरूकता बढ़ाकर कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। यह अध्ययन नीति-निर्माताओं, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी, आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं तथा भविष्य के शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी दिशा-निर्देश प्रदान करता है तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण एवं सतत सामाजिक विकास को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखता है।
Keywords
मातृत्व एवं बाल विकास कार्यक्रम, क्रियान्वयन, समस्याएँ एवं बाधाएँ, कार्यक्रमों की प्रभावशीलता, आईसीडीएस, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, पोषण अभियान, ग्रामीण महिलाएँ इत्यादि ।