Article Abstract
International Journal of Advance Research in Multidisciplinary, 2026;4(3):37-41
मिशन कर्मयोगी और भारत में सुशासन: एक आलोचनात्मक विश्लेषण मिशन कर्मयोगी 2.0 के विशेष संदर्भ में
Author : Ankit
Abstract
भारत में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2020 में राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (National Programme for Civil Services Capacity Building - NPCSCB) के अंतर्गत मिशन कर्मयोगी की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक प्रशिक्षण व्यवस्था को बदलकर क्षमता-आधारित (Competency-based) प्रशिक्षण, सतत अधिगम तथा डिजिटल शिक्षा के माध्यम से लोक सेवकों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है। इस शोध-पत्र में मिशन कर्मयोगी की अवधारणा, उद्देश्यों, प्रमुख विशेषताओं तथा सुशासन के संदर्भ में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन गुणात्मक (Qualitative) एवं द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। निष्कर्षतः यह पाया गया कि मिशन कर्मयोगी प्रशासनिक दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण सुधार है, किन्तु इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल अवसंरचना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, राज्यों की सहभागिता तथा परिणाम-आधारित मूल्यांकन को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। (साथ ही यह भी प्रश्न उठाता है कि क्या केवल प्रशिक्षण और डिजिटल learning platform प्रशासनिक संस्कृति में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं, या इसके लिए संस्थागत सुधार, जवाबदेही तंत्र, और राजनीतिक-प्रशासनिक इच्छाशक्ति भी अनिवार्य है।)
वर्तमान में मिशन कर्मयोगी 2.0 को इस कार्यक्रम का अगला चरण माना जा रहा है, जिसमें केवल व्यक्तिगत क्षमता-विकास नहीं, बल्कि संस्थागत सुधार, संगठनात्मक प्रदर्शन, और प्रशिक्षण को शासन-प्रणाली में गहराई से समाहित करने पर जोर दिया जा रहा है।cbc+2
यह शोध-पत्र मिशन कर्मयोगी और मिशन कर्मयोगी 2.0 का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है और यह प्रश्न उठाता है कि क्या प्रशिक्षण-आधारित यह मॉडल भारत में वास्तविक सुशासन ला सकता है।
Keywords
मिशन कर्मयोगी, सुशासन, प्रशासनिक सुधार, क्षमता निर्माण, सिविल सेवा।